ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْحَىُّ ٱلْقَيُّومُ لَا تَأْخُذُهُۥ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ لَّهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ مَن ذَا ٱلَّذِى يَشْفَعُ عِندَهُۥٓ إِلَّا بِإِذْنِهِۦ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَىْءٍ مِّنْ عِلْمِهِۦٓ إِلَّا بِمَا شَآءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفْظُهُمَا وَهُوَ ٱلْعَلِىُّ ٱلْعَظِيمُ
क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप
وسن
लुप्त ग़नूदगी
शुरुआती तंद्रा जो भगवान को कभी नहीं घेरती।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: सावधानी से संकलित खंड-समूह · प्रयोग: 1
शब्द-मूल: وسن
लेम्मा: سنة
रूप: سِنَةٌ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 1; कुल संख्या: 1
क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 1।
यह अर्थ क्यों चुना गया
एकमात्र लक्ष्य एक अनिश्चितकालीन नाममात्र स्त्री संज्ञा है जो नींद के साथ निषेध के तहत समन्वित है। نَوْمٌ से पहले इसका स्थान नींद से सतर्कता के प्रारंभिक नुकसान को अलग करता है, जबकि दोनों को हमेशा जीवित, आत्मनिर्भर भगवान से वंचित किया जाता है।