وَأَوْحَىٰ رَبُّكَ إِلَى ٱلنَّحْلِ أَنِ ٱتَّخِذِى مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا وَمِنَ ٱلشَّجَرِ وَمِمَّا يَعْرِشُونَ
क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप
النحل
मधुमक्खियाँ
वह होनेय-प्रोदुकिङ इन्सेक्त्स वह रूप कोलोनिएस और कोन्स्त्रुक्त होमेस.
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 1
शब्द-मूल: نحل
लेम्मा: نحل
रूप: نَّحْلِ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 1; कुल संख्या: 1
क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 1।
जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं
मफ़त गरानट
16:68
وَأَوْحَىٰ رَبُّكَ إِلَى ٱلنَّحْلِ أَنِ ٱتَّخِذِى مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا وَمِنَ ٱلشَّجَرِ وَمِمَّا يَعْرِشُونَ
वैकल्पिक: मफ़त गरानट
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: मधुमक्खियाँ
ईश्वर इस समूह को संबोधित करता है और उसे पहाड़ों, पेड़ों तथा मानव-निर्मित संरचनाओं में घर बनाने का निर्देश देता है। घर बनाने वाला जीवित समूह वह तरीका नहीं हो सकता जिससे विवाह-देय हस्तांतरित किया जाता है; इसलिए यह सटीक खंड विहित मूल का खंडन करता है। ईश्वर मधुमक्खियों पर प्रकट करता है कि वे पहाड़ों, पेड़ों और उठाई गई संरचनाओं में घर स्थापित करें, जिससे एक संगठित जीवित समूह की पहचान होती है।