فَلَا وَرَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَ حَتَّىٰ يُحَكِّمُوكَ فِيمَا شَجَرَ بَيْنَهُمْ ثُمَّ لَا يَجِدُوا۟ فِىٓ أَنفُسِهِمْ حَرَجًا مِّمَّا قَضَيْتَ وَيُسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا
क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप
وَ (शपथ-सूचक पूर्वसर्ग)
की ओर से
नाममात्र गवाह का परिचय देता है जिसके तहत निम्नलिखित दावा जोरदार ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 28
लेम्मा: و
रूप: وَ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 28
क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 28। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 18 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।
ثُمَّ لَمْ تَكُن فِتْنَتُهُمْ إِلَّآ أَن قَالُوا۟ وَٱللَّهِ رَبِّنَا مَا كُنَّا مُشْرِكِينَ
وَلَوْ تَرَىٰٓ إِذْ وُقِفُوا۟ عَلَىٰ رَبِّهِمْ قَالَ أَلَيْسَ هَٰذَا بِٱلْحَقِّ قَالُوا۟ بَلَىٰ وَرَبِّنَا قَالَ فَذُوقُوا۟ ٱلْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
فَوَرَبِّكَ لَنَسْـَٔلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
فَوَرَبِّكَ لَنَحْشُرَنَّهُمْ وَٱلشَّيَٰطِينَ ثُمَّ لَنُحْضِرَنَّهُمْ حَوْلَ جَهَنَّمَ جِثِيًّا
وَٱلْقُرْءَانِ ٱلْحَكِيمِ
وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفًّا
صٓ وَٱلْقُرْءَانِ ذِى ٱلذِّكْرِ
وَٱلْكِتَٰبِ ٱلْمُبِينِ
وَٱلْكِتَٰبِ ٱلْمُبِينِ
जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं
और
36:2
وَٱلْقُرْءَانِ ٱلْحَكِيمِ
वैकल्पिक: और बुद्धिमान क़ुरआन
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: हकीमानह क़रआन से
सेगमेनत ोपेनस एक ोअथ नोमिनअल के साथ कोई नहीं परिॉर कोनजुनकत, और 36:3 प्रदान करता है ेमफअतिक अससरशन; अददितिवे और देलेतेस कि क्वरअन-िनतरनअल संबंध.