क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप

دعاء / دعوة

काल

एक कार्य का काल्लिङ, इन्वोकातिओन, इन्वितातिओन, या सुम्मोन्स निर्देशित की ओर एक अद्द्रेस्सेए.

शब्दार्थिक दायरा

दायरा: सावधानी से संकलित खंड-समूह · प्रयोग: 26

शब्द-मूल: دعو

लेम्मा: دعاء · دعوة

रूप: دُعَآءِ · دُعَآءَ · دُّعَآءَ · دُّعَآءِ · دُعَآئِ · دُعَآءً · دَعْوَةَ · دَّعْوَتُ · دَعْوَةُ · دُعَآءُ · دَعْوَتَ · دُعَآؤُ · دَعْوَةً · دَعْوَةٌ · دُعَٰٓؤُا۟ · دُعَآءٍ

प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 26

क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 26। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 16 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।

2:171

وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ كَمَثَلِ ٱلَّذِى يَنْعِقُ بِمَا لَا يَسْمَعُ إِلَّا دُعَآءً وَنِدَآءً صُمٌّۢ بُكْمٌ عُمْىٌ فَهُمْ لَا يَعْقِلُونَ

2:186

وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِى عَنِّى فَإِنِّى قَرِيبٌ أُجِيبُ دَعْوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِ فَلْيَسْتَجِيبُوا۟ لِى وَلْيُؤْمِنُوا۟ بِى لَعَلَّهُمْ يَرْشُدُونَ

3:38

هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُۥ قَالَ رَبِّ هَبْ لِى مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً إِنَّكَ سَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ

10:89

قَالَ قَدْ أُجِيبَت دَّعْوَتُكُمَا فَٱسْتَقِيمَا وَلَا تَتَّبِعَآنِّ سَبِيلَ ٱلَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ

13:14

لَهُۥ دَعْوَةُ ٱلْحَقِّ وَٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُم بِشَىْءٍ إِلَّا كَبَٰسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى ٱلْمَآءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَٰلِغِهِۦ وَمَا دُعَآءُ ٱلْكَٰفِرِينَ إِلَّا فِى ضَلَٰلٍ

13:14

لَهُۥ دَعْوَةُ ٱلْحَقِّ وَٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُم بِشَىْءٍ إِلَّا كَبَٰسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى ٱلْمَآءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَٰلِغِهِۦ وَمَا دُعَآءُ ٱلْكَٰفِرِينَ إِلَّا فِى ضَلَٰلٍ

14:39

ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى وَهَبَ لِى عَلَى ٱلْكِبَرِ إِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ إِنَّ رَبِّى لَسَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ

14:40

رَبِّ ٱجْعَلْنِى مُقِيمَ ٱلصَّلَوٰةِ وَمِن ذُرِّيَّتِى رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَآءِ

14:44

وَأَنذِرِ ٱلنَّاسَ يَوْمَ يَأْتِيهِمُ ٱلْعَذَابُ فَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ رَبَّنَآ أَخِّرْنَآ إِلَىٰٓ أَجَلٍ قَرِيبٍ نُّجِبْ دَعْوَتَكَ وَنَتَّبِعِ ٱلرُّسُلَ أَوَلَمْ تَكُونُوٓا۟ أَقْسَمْتُم مِّن قَبْلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٍ

17:11

وَيَدْعُ ٱلْإِنسَٰنُ بِٱلشَّرِّ دُعَآءَهُۥ بِٱلْخَيْرِ وَكَانَ ٱلْإِنسَٰنُ عَجُولًا

यह अर्थ क्यों चुना गया

सभी 212 पारिवारिक घटनाओं की तीन पृष्ठों में समीक्षा की गई। 170 संरक्षित पूर्ण क्रिया-रूप वाले पुकार अभिलेख अछूते छोड़े गए और वे खुले क्रिया-संज्ञाओं तथा कृदंतों के लिए क्रियात्मक ढांचा देते हैं। 2:186 पर दावत, पुकारने वाला और पूर्ण क्रिया-रूप साथ आते हैं; 54:6 पर पूर्ण क्रिया-रूप वाला पुकारने वाला और कृदंतीय पुकारने वाला भी ऐसा ही करते हैं। 33:4 और 33:37 में अद्इया स्पष्ट रूप से जैविक पुत्रों के बजाय पुत्र कहलाने वाले लोग हैं, जबकि 36:57, 41:31 और 67:27 में VIII रूप वह प्रस्तुत करता है जिस पर कोई दावा करता है। 25:77 पर स्वत्वसूचक दुआ की सहभागी संरचना समीक्षायोग्य रहती है। सात संरेखित साक्षियों की 25:77, 40:43 और 67:27 पर जांच की गई और वे संबंधित रचनाओं को सुरक्षित रखते हैं। कोई स्वीकृत अर्थ या पूर्व-प्रचालन मसौदा संपादित नहीं किया गया।