क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप

غَيْب، غَائِب، غَيَابَة، ٱغْتَابَ

छिपाना

यह शब्द-परिवार छिपाने का संबंध दिखाता है: कोई सत्ता, बात, सहभागी, घटना या स्थान संबंधित उपस्थिति, दृष्टि, जानकारी या पहुँच से छिपा हो। जो एक पर्यवेक्षक से छिपा है वह दूसरे को ज्ञात या बाद में प्रकट हो सकता है।

शब्दार्थिक दायरा

दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 60

शब्द-मूल: غيب

लेम्मा: غيب · غيوب · غائب · غيابت · غائبة · يغتب

रूप: غَيْبِ · غَيْبَ · غَيْبُ · غُيُوبِ · غَآئِبِينَ · غَيَٰبَتِ · غَآئِبَةٍ · يَغْتَب

प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 60

क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 60। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 50 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।

2:3

ٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِٱلْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقْنَٰهُمْ يُنفِقُونَ

2:33

قَالَ يَٰٓـَٔادَمُ أَنۢبِئْهُم بِأَسْمَآئِهِمْ فَلَمَّآ أَنۢبَأَهُم بِأَسْمَآئِهِمْ قَالَ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ إِنِّىٓ أَعْلَمُ غَيْبَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَأَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا كُنتُمْ تَكْتُمُونَ

3:44

ذَٰلِكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يُلْقُونَ أَقْلَٰمَهُمْ أَيُّهُمْ يَكْفُلُ مَرْيَمَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يَخْتَصِمُونَ

3:179

مَّا كَانَ ٱللَّهُ لِيَذَرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ عَلَىٰ مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ حَتَّىٰ يَمِيزَ ٱلْخَبِيثَ مِنَ ٱلطَّيِّبِ وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُطْلِعَكُمْ عَلَى ٱلْغَيْبِ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَجْتَبِى مِن رُّسُلِهِۦ مَن يَشَآءُ فَـَٔامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ وَإِن تُؤْمِنُوا۟ وَتَتَّقُوا۟ فَلَكُمْ أَجْرٌ عَظِيمٌ

4:34

ٱلرِّجَالُ قَوَّٰمُونَ عَلَى ٱلنِّسَآءِ بِمَا فَضَّلَ ٱللَّهُ بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ وَبِمَآ أَنفَقُوا۟ مِنْ أَمْوَٰلِهِمْ فَٱلصَّٰلِحَٰتُ قَٰنِتَٰتٌ حَٰفِظَٰتٌ لِّلْغَيْبِ بِمَا حَفِظَ ٱللَّهُ وَٱلَّٰتِى تَخَافُونَ نُشُوزَهُنَّ فَعِظُوهُنَّ وَٱهْجُرُوهُنَّ فِى ٱلْمَضَاجِعِ وَٱضْرِبُوهُنَّ فَإِنْ أَطَعْنَكُمْ فَلَا تَبْغُوا۟ عَلَيْهِنَّ سَبِيلًا إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيًّا كَبِيرًا

5:94

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَيَبْلُوَنَّكُمُ ٱللَّهُ بِشَىْءٍ مِّنَ ٱلصَّيْدِ تَنَالُهُۥٓ أَيْدِيكُمْ وَرِمَاحُكُمْ لِيَعْلَمَ ٱللَّهُ مَن يَخَافُهُۥ بِٱلْغَيْبِ فَمَنِ ٱعْتَدَىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٌ

5:109

يَوْمَ يَجْمَعُ ٱللَّهُ ٱلرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبْتُمْ قَالُوا۟ لَا عِلْمَ لَنَآ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ

5:116

وَإِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ءَأَنتَ قُلْتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِى وَأُمِّىَ إِلَٰهَيْنِ مِن دُونِ ٱللَّهِ قَالَ سُبْحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِىٓ أَنْ أَقُولَ مَا لَيْسَ لِى بِحَقٍّ إِن كُنتُ قُلْتُهُۥ فَقَدْ عَلِمْتَهُۥ تَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِى وَلَآ أَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِكَ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ

6:50

قُل لَّآ أَقُولُ لَكُمْ عِندِى خَزَآئِنُ ٱللَّهِ وَلَآ أَعْلَمُ ٱلْغَيْبَ وَلَآ أَقُولُ لَكُمْ إِنِّى مَلَكٌ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰٓ إِلَىَّ قُلْ هَلْ يَسْتَوِى ٱلْأَعْمَىٰ وَٱلْبَصِيرُ أَفَلَا تَتَفَكَّرُونَ

6:59

وَعِندَهُۥ مَفَاتِحُ ٱلْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهَآ إِلَّا هُوَ وَيَعْلَمُ مَا فِى ٱلْبَرِّ وَٱلْبَحْرِ وَمَا تَسْقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلَّا يَعْلَمُهَا وَلَا حَبَّةٍ فِى ظُلُمَٰتِ ٱلْأَرْضِ وَلَا رَطْبٍ وَلَا يَابِسٍ إِلَّا فِى كِتَٰبٍ مُّبِينٍ

जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं

भविष्य

3:44

ذَٰلِكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يُلْقُونَ أَقْلَٰمَهُمْ أَيُّهُمْ يَكْفُلُ مَرْيَمَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يَخْتَصِمُونَ

वैकल्पिक: यह भविष्य की सूचनाओं में से है जिसे हम तुम्हें बताते हैं

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: यह छिपी हुई बातों की सूचनाओं में से है जिसे हम तुम्हें बताते हैं

बताई गई पर्चियाँ डालने की घटना अतीत की है; प्रासंगिक विरोध संबोधित व्यक्ति की गैर-मौजूदगी है।

सार्वभौमिक रूप से अज्ञात

5:109

يَوْمَ يَجْمَعُ ٱللَّهُ ٱلرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبْتُمْ قَالُوا۟ لَا عِلْمَ لَنَآ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ

वैकल्पिक: तू उसका जानने वाला है जो सार्वभौमिक रूप से अज्ञात है

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: तू छिपी हुई बातों का जानने वाला है

वस्तु सृष्ट प्राणियों की पहुँच से बाहर है, पर स्पष्ट रूप से अल्लाह के ज्ञान में है।

जिसका साक्ष्य न हुआ हो

11:49

تِلْكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْغَيْبِ نُوحِيهَآ إِلَيْكَ مَا كُنتَ تَعْلَمُهَآ أَنتَ وَلَا قَوْمُكَ مِن قَبْلِ هَٰذَا فَٱصْبِرْ إِنَّ ٱلْعَٰقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ

वैकल्पिक: वे ऐसी घटनाओं की सूचनाओं में से हैं जिनका साक्ष्य नहीं हुआ था

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: वे छिपी हुई बातों की सूचनाओं में से हैं; हम उन्हें तुम्हें बताते हैं, यद्यपि इससे पहले न तुम उन्हें जानते थे, न तुम्हारी जाति

नूह और उनके समकालीनों ने घटनाएँ देखी थीं। आयत इसके बजाय कहती है कि संबोधित व्यक्ति और उसकी जाति को उनका पहले से ज्ञान नहीं था। घटनाएँ वर्तमान श्रोताओं से छिपी थीं, अपने समय में साक्ष्य-विहीन नहीं।

अनुपस्थित

27:20

وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيْرَ فَقَالَ مَا لِىَ لَآ أَرَى ٱلْهُدْهُدَ أَمْ كَانَ مِنَ ٱلْغَآئِبِينَ

वैकल्पिक: मुझे हुदहुद क्यों नहीं दिखाई देता, या वह अनुपस्थितों में है

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: मुझे हुदहुद क्यों नहीं दिखाई देता, या वह छिपे हुओं में है

‘अनुपस्थित’ सुलेमान के निरीक्षण का परिणाम बताकर प्रश्न को सामान्य गैर-मौजूदगी पर बंद कर देता है। ‘छिपा हुआ’ परिवार की शाब्दिक क्रिया सुरक्षित रखता है और पक्षी से संबंधित घटना को जाँच के लिए खुला छोड़ता है।

ख़फ़ीह

27:20

وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيْرَ فَقَالَ مَا لِىَ لَآ أَرَى ٱلْهُدْهُدَ أَمْ كَانَ مِنَ ٱلْغَآئِبِينَ

वैकल्पिक: मुझे हुदहुद क्यों नहीं दिखाई देता, या वह गुप्त रहने वालों में है

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: मुझे हुदहुद क्यों नहीं दिखाई देता, या वह छिपे हुओं में है

पक्षी निरीक्षण में नहीं मिल रहा है; यहाँ जानबूझकर गोपनीयता का कोई विधान नहीं है।

अदृश्य

49:12

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱجْتَنِبُوا۟ كَثِيرًا مِّنَ ٱلظَّنِّ إِنَّ بَعْضَ ٱلظَّنِّ إِثْمٌ وَلَا تَجَسَّسُوا۟ وَلَا يَغْتَب بَّعْضُكُم بَعْضًا أَيُحِبُّ أَحَدُكُمْ أَن يَأْكُلَ لَحْمَ أَخِيهِ مَيْتًا فَكَرِهْتُمُوهُ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ إِنَّ ٱللَّهَ تَوَّابٌ رَّحِيمٌ

वैकल्पिक: एक-दूसरे के विरुद्ध अदृश्य रूप से मत बोलो

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: एक-दूसरे से छिपकर एक-दूसरे के विरुद्ध मत बोलो

रूप VIII अनुपस्थिति पर आधारित सहभागी संरचना व्यक्त करता है, वक्ता की दृष्टिगत अदृश्यता नहीं।

अनुपस्थिति

72:26

عَٰلِمُ ٱلْغَيْبِ فَلَا يُظْهِرُ عَلَىٰ غَيْبِهِۦٓ أَحَدًا

वैकल्पिक: अनुपस्थिति का जानने वाला; वह अपनी अनुपस्थिति पर किसी को प्रकट नहीं करता

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: छिपी हुई बातों का जानने वाला; वह अपनी छिपी बातें किसी पर प्रकट नहीं करता

स्वामित्वसूचक غَيْبِهِ ऐसा क्षेत्र है जिसे ईश्वर किसी चुने हुए संदेशवाहक पर प्रकट कर सकता है। यह ईश्वर की अनुपस्थिति नहीं; यह वह है जिसे उसने सृष्ट प्राणियों से छिपाया है, जब तक वह इसे प्रकट न करे।

लुप्त

82:16

وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ

वैकल्पिक: वे उससे लुप्त नहीं किए जाएँगे

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: वे उससे छिपे नहीं होंगे

कृदंत उपस्थिति-संबंध की अवस्था का विधान करता है, अवस्था-परिवर्तन वाली लुप्त होने की घटना का नहीं।

यह अर्थ क्यों चुना गया

क़ुरआनी परिवार की सभी 60 घटनाएँ एक क्रिया ‘छिपाना’ का समर्थन करती हैं: غَيْب का अनुवाद ‘छिपा हुआ’, غُيُوب का ‘छिपी बातें’, غَائِب का ‘छिपा हुआ’, غَيَابَة का ‘छिपाने वाला गड्ढा’, غَائِبَة का ‘छिपी वस्तु’ और يَغْتَب का ‘किसी से छिपकर उसके विरुद्ध बोलना’ होता है। ‘जिसका साक्ष्य न हुआ हो’ ऐतिहासिक रूप से देखी गई घटनाओं पर विफल होता है; ‘अनुपस्थिति’ ईश्वर की स्वामित्व वाली, प्रकट की जा सकने वाली छिपी बातों पर विफल होती है; और 27:20 में सामान्य अनुपस्थिति उस प्रश्न को समय से पहले बंद कर देती है जिसे शाब्दिक मूल खुला रखे।