يَوْمَ يَجْمَعُ ٱللَّهُ ٱلرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبْتُمْ قَالُوا۟ لَا عِلْمَ لَنَآ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ
क़ुरआन शब्दावली · स्वीकृत
غُيُوب، غَائِب، غَيَابَة، ٱغْتَابَ
छिपाना
غيب के व्युत्पन्न रूप एक ही मूल छिपाने को रखते हैं: छिपी बातें, छिपे सहभागी, छिपाने वाला गर्त, छिपी वस्तु और किसी से छिपकर उसके विरुद्ध बोलना।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: सावधानी से संकलित खंड-समूह · प्रयोग: 11
शब्द-मूल: غيب
लेम्मा: غيوب · غائب · غيابت · غائبة · يغتب
रूप: غُيُوبِ · غَآئِبِينَ · غَيَٰبَتِ · غَآئِبَةٍ · يَغْتَب
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 11
क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 11। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 1 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।
وَإِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ءَأَنتَ قُلْتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِى وَأُمِّىَ إِلَٰهَيْنِ مِن دُونِ ٱللَّهِ قَالَ سُبْحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِىٓ أَنْ أَقُولَ مَا لَيْسَ لِى بِحَقٍّ إِن كُنتُ قُلْتُهُۥ فَقَدْ عَلِمْتَهُۥ تَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِى وَلَآ أَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِكَ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ
فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِم بِعِلْمٍ وَمَا كُنَّا غَآئِبِينَ
أَلَمْ يَعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يَعْلَمُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَىٰهُمْ وَأَنَّ ٱللَّهَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ
قَالَ قَآئِلٌ مِّنْهُمْ لَا تَقْتُلُوا۟ يُوسُفَ وَأَلْقُوهُ فِى غَيَٰبَتِ ٱلْجُبِّ يَلْتَقِطْهُ بَعْضُ ٱلسَّيَّارَةِ إِن كُنتُمْ فَٰعِلِينَ
فَلَمَّا ذَهَبُوا۟ بِهِۦ وَأَجْمَعُوٓا۟ أَن يَجْعَلُوهُ فِى غَيَٰبَتِ ٱلْجُبِّ وَأَوْحَيْنَآ إِلَيْهِ لَتُنَبِّئَنَّهُم بِأَمْرِهِمْ هَٰذَا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيْرَ فَقَالَ مَا لِىَ لَآ أَرَى ٱلْهُدْهُدَ أَمْ كَانَ مِنَ ٱلْغَآئِبِينَ
وَمَا مِنْ غَآئِبَةٍ فِى ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِلَّا فِى كِتَٰبٍ مُّبِينٍ
قُلْ إِنَّ رَبِّى يَقْذِفُ بِٱلْحَقِّ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱجْتَنِبُوا۟ كَثِيرًا مِّنَ ٱلظَّنِّ إِنَّ بَعْضَ ٱلظَّنِّ إِثْمٌ وَلَا تَجَسَّسُوا۟ وَلَا يَغْتَب بَّعْضُكُم بَعْضًا أَيُحِبُّ أَحَدُكُمْ أَن يَأْكُلَ لَحْمَ أَخِيهِ مَيْتًا فَكَرِهْتُمُوهُ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ إِنَّ ٱللَّهَ تَوَّابٌ رَّحِيمٌ
जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं
अज्ञात
5:109
يَوْمَ يَجْمَعُ ٱللَّهُ ٱلرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبْتُمْ قَالُوا۟ لَا عِلْمَ لَنَآ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ
वैकल्पिक: निश्चय ही, तू अज्ञात बातों का जानने वाला है।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: निश्चय ही, तू छिपी हुई बातों का जानने वाला है।
इन बातों को सार्वभौमिक रूप से अज्ञात कहना उपवाक्य के स्पष्ट कथन से टकराता है कि ईश्वर उन्हें जानता है। ‘छिपा हुआ’ संबंधपरक है, समस्त ज्ञान से बाहर नहीं।
अनुपस्थित
27:20
وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيْرَ فَقَالَ مَا لِىَ لَآ أَرَى ٱلْهُدْهُدَ أَمْ كَانَ مِنَ ٱلْغَآئِبِينَ
वैकल्पिक: मुझे हुदहुद क्यों नहीं दिखाई देता, या वह अनुपस्थितों में है?
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: मुझे हुदहुद क्यों नहीं दिखाई देता, या वह छिपे हुओं में है?
‘अनुपस्थित’ प्रश्न को सामान्य गैर-मौजूदगी पर बंद कर देता है। ‘छिपा हुआ’ غيب परिवार की क्रिया सुरक्षित रखता है और पक्षी के व्यवहार को क़ुरआन-अंतर्गत जाँच के लिए खुला छोड़ता है।
अनदेखा
49:12
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱجْتَنِبُوا۟ كَثِيرًا مِّنَ ٱلظَّنِّ إِنَّ بَعْضَ ٱلظَّنِّ إِثْمٌ وَلَا تَجَسَّسُوا۟ وَلَا يَغْتَب بَّعْضُكُم بَعْضًا أَيُحِبُّ أَحَدُكُمْ أَن يَأْكُلَ لَحْمَ أَخِيهِ مَيْتًا فَكَرِهْتُمُوهُ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ إِنَّ ٱللَّهَ تَوَّابٌ رَّحِيمٌ
वैकल्पिक: तुममें से कोई दूसरे के विरुद्ध अनदेखे रूप में न बोले।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: तुममें से कोई दूसरे से छिपकर उसके विरुद्ध न बोले।
वाणी लक्षित व्यक्ति से छिपी है; संरचना संबंधपरक है, केवल दृष्टिगत अदृश्यता नहीं।
ख़फ़ीह
82:16
وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ
वैकल्पिक: और वे उससे गुप्त नहीं होंगे।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: और वे उससे छिपे नहीं होंगे।
उपवाक्य उनके अग्नि से छिपे होने का निषेध करता है। किसी रहस्य को बनाए रखने का इरादा मौजूद नहीं है।
यह अर्थ क्यों चुना गया
क़ुरआनी परिवार की सभी 60 घटनाएँ एक क्रिया ‘छिपाना’ का समर्थन करती हैं: غَيْب का अनुवाद ‘छिपा हुआ’, غُيُوب का ‘छिपी बातें’, غَائِب का ‘छिपा हुआ’, غَيَابَة का ‘छिपाने वाला गड्ढा’, غَائِبَة का ‘छिपी वस्तु’ और يَغْتَب का ‘किसी से छिपकर उसके विरुद्ध बोलना’ होता है। ‘जिसका साक्ष्य न हुआ हो’ ऐतिहासिक रूप से देखी गई घटनाओं पर विफल होता है; ‘अनुपस्थिति’ ईश्वर की स्वामित्व वाली, प्रकट की जा सकने वाली छिपी बातों पर विफल होती है; और 27:20 में सामान्य अनुपस्थिति उस प्रश्न को समय से पहले बंद कर देती है जिसे शाब्दिक मूल खुला रखे।