أَوَلَمْ يَرَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَنَّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًا فَفَتَقْنَٰهُمَا وَجَعَلْنَا مِنَ ٱلْمَآءِ كُلَّ شَىْءٍ حَىٍّ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ
क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप
فتق
काइनाती लीहदगी
छिद्र वह आकाशों और धरती अलग से उनका फोर्मेर जोइनेद अवस्था.
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: सावधानी से संकलित खंड-समूह · प्रयोग: 1
शब्द-मूल: فتق
लेम्मा: فتق
रूप: فَتَقْ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 1; कुल संख्या: 1
क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 1।
यह अर्थ क्यों चुना गया
एकमात्र लक्ष्य एक प्रथम-व्यक्ति-बहुवचन रूप है जो आकाश और पृथ्वी के साथ अपनी दोहरी वस्तु के रूप में परिपूर्ण है। पूर्ववर्ती विधेय رَتْقًا उनकी पूर्व जुड़ी हुई स्थिति देता है, जिससे लक्ष्य विपरीत कार्य बन जाता है जो उन्हें अलग करता है।