وَأَنذِرِ ٱلنَّاسَ يَوْمَ يَأْتِيهِمُ ٱلْعَذَابُ فَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ رَبَّنَآ أَخِّرْنَآ إِلَىٰٓ أَجَلٍ قَرِيبٍ نُّجِبْ دَعْوَتَكَ وَنَتَّبِعِ ٱلرُّسُلَ أَوَلَمْ تَكُونُوٓا۟ أَقْسَمْتُم مِّن قَبْلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٍ
क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप
زَوَال
रूानगी
मौखिक संज्ञा प्रस्थान या निष्कासन के माध्यम से एक स्थापित सांसारिक स्थिति के अंत को दर्शाती है।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: सावधानी से संकलित खंड-समूह · प्रयोग: 1
शब्द-मूल: زول
लेम्मा: زوال
रूप: زَوَالٍ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 1; कुल संख्या: 1
क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 1।
यह अर्थ क्यों चुना गया
सभी चार पारिवारिक प्रयोगों की एक सीमित पृष्ठ पर समीक्षा की गई; प्रत्येक प्रयोग एक स्थिर लक्ष्य है, जिसमें कोई संरक्षित अभिलेख या संक्षिप्त उम्मीदवार नहीं है। 14:44 में क्रियासंज्ञा सांसारिक स्थिरता से प्रस्थान का निषेध करती है। रूप I क्रियाएँ पर्वतों, आकाशों और पृथ्वी को अपनी स्थापित स्थिति से संभावित रूप से हटते हुए प्रस्तुत करती हैं; काल, विधि, पुरुष, लिंग, द्विवचन-सामंजस्य और निषेध-उपवाक्य रूपात्मक रूप से संयोजित होते हैं। भौतिक विस्थापन और स्थापित दशा का अंत प्रस्थान के संदर्भगत प्रयोग हैं, क़ुरआन-आंतरिक विरोधाभास नहीं। कोई संरेखित पठन-पेलोड या अनसुलझा प्रश्न शेष नहीं है।