يَٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتِىَ ٱلَّتِىٓ أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَنِّى فَضَّلْتُكُمْ عَلَى ٱلْعَٰلَمِينَ
क़ुरआन शब्दावली · स्वीकृत
فَضَّلَ / فَضْل / تَفْضِيل / تَفَضَّلَ
आगे बढ़ना
किसी प्रासंगिक पैमाने पर प्रसंग द्वारा दिए गए तुलनीय पक्ष या निर्धारित माप से आगे होना।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 104
शब्द-मूल: فضل
लेम्मा: فضل · تفضيل · يتفضل
रूप: فَضْلِ · فَضْلُ · فَضْلٍ · فَضْلًا · فَضَّلْ · فَضَّلَ · فَضْلَ · تَفْضِيلًا · فَضْلٌ · فَضْلٍۭ · نُفَضِّلُ · فُضِّلُ · يَتَفَضَّلَ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 104
क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 104। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 94 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।
ثُمَّ تَوَلَّيْتُم مِّنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ فَلَوْلَا فَضْلُ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ لَكُنتُم مِّنَ ٱلْخَٰسِرِينَ
بِئْسَمَا ٱشْتَرَوْا۟ بِهِۦٓ أَنفُسَهُمْ أَن يَكْفُرُوا۟ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بَغْيًا أَن يُنَزِّلَ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ فَبَآءُو بِغَضَبٍ عَلَىٰ غَضَبٍ وَلِلْكَٰفِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ
مَّا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَٰبِ وَلَا ٱلْمُشْرِكِينَ أَن يُنَزَّلَ عَلَيْكُم مِّنْ خَيْرٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَٱللَّهُ يَخْتَصُّ بِرَحْمَتِهِۦ مَن يَشَآءُ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
يَٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتِىَ ٱلَّتِىٓ أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَنِّى فَضَّلْتُكُمْ عَلَى ٱلْعَٰلَمِينَ
لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَن تَبْتَغُوا۟ فَضْلًا مِّن رَّبِّكُمْ فَإِذَآ أَفَضْتُم مِّنْ عَرَفَٰتٍ فَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ عِندَ ٱلْمَشْعَرِ ٱلْحَرَامِ وَٱذْكُرُوهُ كَمَا هَدَىٰكُمْ وَإِن كُنتُم مِّن قَبْلِهِۦ لَمِنَ ٱلضَّآلِّينَ
وَإِن طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِن قَبْلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ وَقَدْ فَرَضْتُمْ لَهُنَّ فَرِيضَةً فَنِصْفُ مَا فَرَضْتُمْ إِلَّآ أَن يَعْفُونَ أَوْ يَعْفُوَا۟ ٱلَّذِى بِيَدِهِۦ عُقْدَةُ ٱلنِّكَاحِ وَأَن تَعْفُوٓا۟ أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ وَلَا تَنسَوُا۟ ٱلْفَضْلَ بَيْنَكُمْ إِنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ خَرَجُوا۟ مِن دِيَٰرِهِمْ وَهُمْ أُلُوفٌ حَذَرَ ٱلْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ ٱللَّهُ مُوتُوا۟ ثُمَّ أَحْيَٰهُمْ إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
فَهَزَمُوهُم بِإِذْنِ ٱللَّهِ وَقَتَلَ دَاوُۥدُ جَالُوتَ وَءَاتَىٰهُ ٱللَّهُ ٱلْمُلْكَ وَٱلْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُۥ مِمَّا يَشَآءُ وَلَوْلَا دَفْعُ ٱللَّهِ ٱلنَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّفَسَدَتِ ٱلْأَرْضُ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلْعَٰلَمِينَ
تِلْكَ ٱلرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ مِّنْهُم مَّن كَلَّمَ ٱللَّهُ وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَٰتٍ وَءَاتَيْنَا عِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ٱلْبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدْنَٰهُ بِرُوحِ ٱلْقُدُسِ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقْتَتَلَ ٱلَّذِينَ مِنۢ بَعْدِهِم مِّنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَٰتُ وَلَٰكِنِ ٱخْتَلَفُوا۟ فَمِنْهُم مَّنْ ءَامَنَ وَمِنْهُم مَّن كَفَرَ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقْتَتَلُوا۟ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ
जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं
श्रेष्ठता
4:173
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِۦ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱسْتَنكَفُوا۟ وَٱسْتَكْبَرُوا۟ فَيُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
वैकल्पिक: वह उनकी मजदूरी पूरी चुकाएगा और अपनी श्रेष्ठता से उन्हें बढ़ाएगा।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: वह उनकी मजदूरी पूरी चुकाएगा और अपने हितकारी अतिरिक्त से उन्हें बढ़ाएगा।
आयत प्राप्तकर्ताओं की मजदूरी पूरी करती है और फिर दिव्य स्रोत से अधिक देती है। श्रेष्ठता पद-क्रम का संबंध बताएगी और पूरे किए गए देय से आगे दी गई अतिरिक्त भलाई का नाम नहीं बन सकती।
उदार दान या अनुग्रह
7:39
وَقَالَتْ أُولَىٰهُمْ لِأُخْرَىٰهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍ فَذُوقُوا۟ ٱلْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
वैकल्पिक: तुम्हें हम पर कोई उदार दान या अनुग्रह प्राप्त नहीं था।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: तुम्हें हम पर कोई हितकारी अतिरिक्त प्राप्त नहीं था।
वक्ता इस बात से इनकार करते हैं कि एक समूह को दूसरे पर कोई तुलनात्मक अंतर मिला था। उदार दान या अनुग्रह उस पारस्परिक तुलना में स्वाभाविक रूप से नहीं बैठता और इसलिए शब्द-परिवार का स्थिर अर्थ नहीं हो सकता।
अनुग्रह या वरीयता
13:4
وَفِى ٱلْأَرْضِ قِطَعٌ مُّتَجَٰوِرَٰتٌ وَجَنَّٰتٌ مِّنْ أَعْنَٰبٍ وَزَرْعٌ وَنَخِيلٌ صِنْوَانٌ وَغَيْرُ صِنْوَانٍ يُسْقَىٰ بِمَآءٍ وَٰحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍ فِى ٱلْأُكُلِ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَٰتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
वैकल्पिक: उन्हें एक ही पानी से सींचा जाता है, और हम उपज में उनमें से कुछ को दूसरों पर वरीयता देते हैं।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: उन्हें एक ही पानी से सींचा जाता है, और हम उपज में उनमें से कुछ को दूसरों से आगे बढ़ाते हैं।
आयत एक ही पानी पाने वाली वनस्पति की उपज में मापने योग्य अंतर प्रस्तुत करती है। अनुग्रह या वरीयता दृष्टिकोण अथवा चयन को आगे रखती है और उत्पन्न किए गए पैमानीय परिणाम को छिपाती है।
जीविका
16:71
وَٱللَّهُ فَضَّلَ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ فِى ٱلرِّزْقِ فَمَا ٱلَّذِينَ فُضِّلُوا۟ بِرَآدِّى رِزْقِهِمْ عَلَىٰ مَا مَلَكَتْ أَيْمَٰنُهُمْ فَهُمْ فِيهِ سَوَآءٌ أَفَبِنِعْمَةِ ٱللَّهِ يَجْحَدُونَ
वैकल्पिक: ईश्वर ने तुममें से कुछ को जीविका में दूसरों के ऊपर जीविका दी।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: ईश्वर ने तुममें से कुछ को जीविका में दूसरों से आगे बढ़ाया।
जीविका स्पष्ट रूप से वह पैमाना है जिसमें कुछ को दूसरों से आगे बढ़ाया जाता है। उसे मूल अर्थ बनाने से पैमाना दोहरता है और तुलनात्मक क्रिया मिट जाती है।
निरा अतिरिक्त
24:22
وَلَا يَأْتَلِ أُو۟لُوا۟ ٱلْفَضْلِ مِنكُمْ وَٱلسَّعَةِ أَن يُؤْتُوٓا۟ أُو۟لِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْمَسَٰكِينَ وَٱلْمُهَٰجِرِينَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلْيَعْفُوا۟ وَلْيَصْفَحُوٓا۟ أَلَا تُحِبُّونَ أَن يَغْفِرَ ٱللَّهُ لَكُمْ وَٱللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
वैकल्पिक: तुममें से अतिरिक्त और सामर्थ्य वाले यह शपथ न लें कि वे देंगे नहीं।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: तुममें से हितकारी अतिरिक्त और सामर्थ्य वाले यह शपथ न लें कि वे देंगे नहीं।
आधुनिक अंग्रेज़ी में बिना विशेषण का ‘अतिरिक्त’ सहज ही अति-भोग, अपव्यय या जरूरत से अधिक होने का संकेत देता है। यहाँ यह उन लोगों की विशेषता है जो निर्धारित दावे से आगे दे सकते हैं, इसलिए नियंत्रित संज्ञा-रूप में हितकारी पहलू स्पष्ट रहना चाहिए।
वृद्धि
35:30
لِيُوَفِّيَهُمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِۦٓ إِنَّهُۥ غَفُورٌ شَكُورٌ
वैकल्पिक: वह उनकी मजदूरी पूरी चुका दे और अपनी वृद्धि से उन्हें बढ़ाए।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: वह उनकी मजदूरी पूरी चुका दे और अपने हितकारी अतिरिक्त से उन्हें बढ़ाए।
आयत वृद्धि को अलग क्रिया से व्यक्त करती है और उसे فَضْل से आने वाली बताती है। दोनों शब्दों को ‘वृद्धि’ बना देना कुरआन के क्रिया और स्रोत के भेद को नष्ट कर देता है।
लाभ
57:21
سَابِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا كَعَرْضِ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ أُعِدَّتْ لِلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ ذَٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
वैकल्पिक: वह ईश्वर का लाभ है; वह उसे जिसे चाहता है देता है, और ईश्वर महान लाभ का स्वामी है।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: वह ईश्वर का हितकारी अतिरिक्त है; वह उसे जिसे चाहता है देता है, और ईश्वर महान हितकारी अतिरिक्त का स्वामी है।
अंग्रेज़ी में ‘लाभ’ सामान्यतः लाभार्थी की तुलनात्मक स्थिति को सामने रखता है। यहाँ ईश्वर فَضْل का स्वामी है और उसे देता है; इसलिए ‘लाभ’ को पूरे शब्द-परिवार का मूल बनाने से यह कहने का जोखिम होता है कि ईश्वर लाभ पाने वाला पक्ष है, न कि किसी हितकारी अतिरिक्त मात्रा का स्रोत।