يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ لَا تَغْلُوا۟ فِى دِينِكُمْ وَلَا تَقُولُوا۟ عَلَى ٱللَّهِ إِلَّا ٱلْحَقَّ إِنَّمَا ٱلْمَسِيحُ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ رَسُولُ ٱللَّهِ وَكَلِمَتُهُۥٓ أَلْقَىٰهَآ إِلَىٰ مَرْيَمَ وَرُوحٌ مِّنْهُ فَـَٔامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ وَلَا تَقُولُوا۟ ثَلَٰثَةٌ ٱنتَهُوا۟ خَيْرًا لَّكُمْ إِنَّمَا ٱللَّهُ إِلَٰهٌ وَٰحِدٌ سُبْحَٰنَهُۥٓ أَن يَكُونَ لَهُۥ وَلَدٌ لَّهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلًا
क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप
غلو
सीमा से तजाूज़
धार्मिक दावों को नियंत्रित करने वाली सत्य सीमा को पार करना।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: सावधानी से संकलित खंड-समूह · प्रयोग: 2
शब्द-मूल: غلو
लेम्मा: تغلو
रूप: تَغْلُو
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 2; कुल संख्या: 2
क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 2।
قُلْ يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ لَا تَغْلُوا۟ فِى دِينِكُمْ غَيْرَ ٱلْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوٓا۟ أَهْوَآءَ قَوْمٍ قَدْ ضَلُّوا۟ مِن قَبْلُ وَأَضَلُّوا۟ كَثِيرًا وَضَلُّوا۟ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ
यह अर्थ क्यों चुना गया
दोनों लक्ष्य एकसमान द्वितीय-पुरुष बहुवचन रूप I जुस्सिव हैं, لَا से निषेधित और अहले-किताब को संबोधित। आसपास के उपवाक्य सत्य के संबंध में अति का विरोध करते हैं, ईश्वर के बारे में निराधार कथन को मना करते हैं और पूर्ववर्ती भूल का अनुसरण करने से चेताते हैं।