क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप

شرح

एक्स्पन्द् भीतरी क्षमता

किसी व्यक्ति के स्तन को आंतरिक क्षमता के रूप में खोलना ताकि वह एक अभिविन्यास प्राप्त कर सके या उसके सामने आने वाली चीजों को सहन कर सके।

शब्दार्थिक दायरा

दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 5

शब्द-मूल: شرح

लेम्मा: شرح

रूप: شَرَحَ · يَشْرَحْ · ٱشْرَحْ · نَشْرَحْ

प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 5; कुल संख्या: 5

क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 5।

6:125

فَمَن يُرِدِ ٱللَّهُ أَن يَهْدِيَهُۥ يَشْرَحْ صَدْرَهُۥ لِلْإِسْلَٰمِ وَمَن يُرِدْ أَن يُضِلَّهُۥ يَجْعَلْ صَدْرَهُۥ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِى ٱلسَّمَآءِ كَذَٰلِكَ يَجْعَلُ ٱللَّهُ ٱلرِّجْسَ عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ

16:106

مَن كَفَرَ بِٱللَّهِ مِنۢ بَعْدِ إِيمَٰنِهِۦٓ إِلَّا مَنْ أُكْرِهَ وَقَلْبُهُۥ مُطْمَئِنٌّۢ بِٱلْإِيمَٰنِ وَلَٰكِن مَّن شَرَحَ بِٱلْكُفْرِ صَدْرًا فَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ مِّنَ ٱللَّهِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ

20:25

قَالَ رَبِّ ٱشْرَحْ لِى صَدْرِى

39:22

أَفَمَن شَرَحَ ٱللَّهُ صَدْرَهُۥ لِلْإِسْلَٰمِ فَهُوَ عَلَىٰ نُورٍ مِّن رَّبِّهِۦ فَوَيْلٌ لِّلْقَٰسِيَةِ قُلُوبُهُم مِّن ذِكْرِ ٱللَّهِ أُو۟لَٰٓئِكَ فِى ضَلَٰلٍ مُّبِينٍ

94:1

أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ

जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं

प्रतिबंधित

6:125

فَمَن يُرِدِ ٱللَّهُ أَن يَهْدِيَهُۥ يَشْرَحْ صَدْرَهُۥ لِلْإِسْلَٰمِ وَمَن يُرِدْ أَن يُضِلَّهُۥ يَجْعَلْ صَدْرَهُۥ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِى ٱلسَّمَآءِ كَذَٰلِكَ يَجْعَلُ ٱللَّهُ ٱلرِّجْسَ عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ

वैकल्पिक: वह इस्लाम के लिए अपने सीने को सिकोड़ता है, लेकिन एक के सीने को संकीर्ण और संकीर्ण रूप से गुमराह करने की इच्छा रखता है

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: वह एक्स्पान्द्स उसका वक्ष के लिए इस्लाम, किन्तु बनाता है वह अन्य वक्ष संकीर्ण और कोन्स्त्रिक्तेद

वह वेर्से स्पष्टतः विरोध्स वह लक्ष्य ओपेरातिओन के साथ संकीर्ण कोन्स्त्रिक्तिओन.

असलाम स्वीकार करो

16:106

مَن كَفَرَ بِٱللَّهِ مِنۢ بَعْدِ إِيمَٰنِهِۦٓ إِلَّا مَنْ أُكْرِهَ وَقَلْبُهُۥ مُطْمَئِنٌّۢ بِٱلْإِيمَٰنِ وَلَٰكِن مَّن شَرَحَ بِٱلْكُفْرِ صَدْرًا فَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ مِّنَ ٱللَّهِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ

वैकल्पिक: जिसने भी अविश्वास के साथ इस्लाम स्वीकार किया

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: जो कोई एक्स्पन्देद् उसका वक्ष की ओर अविश्वास

वह ओवेर्त दिस्बेलिएफ कोम्प्लेमेन्त कोन्त्रादिक्त्स एक इस्लाम-स्पेकिफिक शाब्दिक कोरे.

व्याख्या करें

20:25

قَالَ رَبِّ ٱشْرَحْ لِى صَدْرِى

वैकल्पिक: प्रभु, एक्स्प्लइन् मेरा वक्ष के लिए मुझे

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: प्रभु, एक्स्पन्द् मेरा वक्ष के लिए मुझे

एक वक्ष है वह अफ्फेक्तेद क्षमता, नहीं प्रोपोसितिओनाल विषयवस्तु वह सकता है होना एक्स्प्लाइनेद.