क़ुरआन शब्दावली · स्वीकृत

بَاطِل / بَطَلَ / أَبْطَلَ / مُبْطِل

अमान्य

किसी दावे, कर्म, परिणाम या वस्तु का वैध स्थिति या प्रभाव से रहित होना या उसे खो देना, अथवा किसी कर्ता का उस स्थिति या प्रभाव को हटा देना।

शब्दार्थिक दायरा

दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 36

शब्द-मूल: بطل

लेम्मा: باطل · مبطل · يبطل · بطل

रूप: بَٰطِلِ · مُبْطِلُونَ · بَٰطِلَ · بَٰطِلُ · تُبْطِلُ · بَٰطِلًا · بَٰطِلٌ · بَطَلَ · يُبْطِلَ · يُبْطِلُ

प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 36

क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 36। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 26 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।

2:42

وَلَا تَلْبِسُوا۟ ٱلْحَقَّ بِٱلْبَٰطِلِ وَتَكْتُمُوا۟ ٱلْحَقَّ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ

2:188

وَلَا تَأْكُلُوٓا۟ أَمْوَٰلَكُم بَيْنَكُم بِٱلْبَٰطِلِ وَتُدْلُوا۟ بِهَآ إِلَى ٱلْحُكَّامِ لِتَأْكُلُوا۟ فَرِيقًا مِّنْ أَمْوَٰلِ ٱلنَّاسِ بِٱلْإِثْمِ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ

2:264

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُبْطِلُوا۟ صَدَقَٰتِكُم بِٱلْمَنِّ وَٱلْأَذَىٰ كَٱلَّذِى يُنفِقُ مَالَهُۥ رِئَآءَ ٱلنَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ فَمَثَلُهُۥ كَمَثَلِ صَفْوَانٍ عَلَيْهِ تُرَابٌ فَأَصَابَهُۥ وَابِلٌ فَتَرَكَهُۥ صَلْدًا لَّا يَقْدِرُونَ عَلَىٰ شَىْءٍ مِّمَّا كَسَبُوا۟ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْكَٰفِرِينَ

3:71

يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ لِمَ تَلْبِسُونَ ٱلْحَقَّ بِٱلْبَٰطِلِ وَتَكْتُمُونَ ٱلْحَقَّ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ

3:191

ٱلَّذِينَ يَذْكُرُونَ ٱللَّهَ قِيَٰمًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِى خَلْقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَٰطِلًا سُبْحَٰنَكَ فَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

4:29

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تَأْكُلُوٓا۟ أَمْوَٰلَكُم بَيْنَكُم بِٱلْبَٰطِلِ إِلَّآ أَن تَكُونَ تِجَٰرَةً عَن تَرَاضٍ مِّنكُمْ وَلَا تَقْتُلُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا

4:161

وَأَخْذِهِمُ ٱلرِّبَوٰا۟ وَقَدْ نُهُوا۟ عَنْهُ وَأَكْلِهِمْ أَمْوَٰلَ ٱلنَّاسِ بِٱلْبَٰطِلِ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَٰفِرِينَ مِنْهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا

7:118

فَوَقَعَ ٱلْحَقُّ وَبَطَلَ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

7:139

إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ مُتَبَّرٌ مَّا هُمْ فِيهِ وَبَٰطِلٌ مَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

7:173

أَوْ تَقُولُوٓا۟ إِنَّمَآ أَشْرَكَ ءَابَآؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةً مِّنۢ بَعْدِهِمْ أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلْمُبْطِلُونَ

क़ुरआन-अंतर्गत शब्दार्थिक आधार

रूप एक ही मूल अर्थ को कैसे बनाए रखते हैं

यह परिवार अमान्य का मूल बनाए रखता है: वैध स्थिति या प्रभाव का अभाव, हानि या हटाया जाना। रूपविज्ञान अमान्य, अमान्य हो गया, अमान्य करना और अमान्य करने वाले के रूप बनाता है।

بَاطِل किसी वस्तु को अमान्य रूप में प्रस्तुत करता है। प्रथम रूप उसके अमान्य हो जाने को, चतुर्थ रूप किसी कर्ता द्वारा उसे अमान्य करने को, और مُبْطِل अमान्य करने वाले को नाम देता है। ये एक ही क्रिया के व्याकरणिक रूप हैं, अलग शब्दार्थ नहीं।

3:191 में वाक्य को “किसी वैध आधार के बिना” रचना चाहिए। आकाश और धरती रची गई संदर्भित वस्तुएँ हैं, प्रतिज्ञप्तियाँ नहीं; इसलिए “असत्य” कथन-सदृश अर्थ में बहुत संकीर्ण है। शब्दगत मूल अमान्य ही रहता है।

जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं

असत्य

3:191

ٱلَّذِينَ يَذْكُرُونَ ٱللَّهَ قِيَٰمًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِى خَلْقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَٰطِلًا سُبْحَٰنَكَ فَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

वैकल्पिक: हमारे पालनकर्ता, आपने इसे असत्य के रूप में नहीं रचा।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: हमारे पालनकर्ता, आपने इसे किसी वैध आधार के बिना नहीं रचा।

संदर्भित वस्तुएँ रचे गए आकाश और धरती हैं, कोई ऐसा कथन नहीं जो सत्य या असत्य हो सकता हो। “किसी वैध आधार के बिना” अमान्य का अंग्रेज़ी वाक्यगत रूप है: सृष्टि के वैध आधार या प्रयोजन से रहित होने का निषेध किया गया है।