क़ुरआन शब्दावली · स्वीकृत

جَزَى / جَزَاء / جَازٍ / جِزْيَة / نُجَازِي

प्रतिफल देना

जो किया गया, प्राप्त हुआ या देय था, उसके अनुरूप प्रत्युत्तरी प्रतिफल देना।

शब्दार्थिक दायरा

दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 118

शब्द-मूल: جزي

लेम्मा: جزى · جزاء · جزية · جاز · نجازي

रूप: نَجْزِى · جَزَآءُ · تُجْزَ · يَجْزِىَ · جَزَآءً · جَزَآؤُ · جَزَآءًۢ · يُجْزَ · يَجْزِى · جَزَٰٓؤُا۟ · يَجْزِيَ · نَجْزِيَ · جَزَيْ · جَزَٰٓؤُ · تُجْزَىٰ · تَجْزِى · يَجْزِي · يُجْزَىٰٓ · جَزَآءٌ · جِزْيَةَ · نَجْزِي · يُجْزَى · جَازٍ · نُجَٰزِىٓ · يُجْزَىٰ · جَزَآءَ · جَزَىٰ · تُجْزَىٰٓ

प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 118

क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 118। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 108 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।

2:48

وَٱتَّقُوا۟ يَوْمًا لَّا تَجْزِى نَفْسٌ عَن نَّفْسٍ شَيْـًٔا وَلَا يُقْبَلُ مِنْهَا شَفَٰعَةٌ وَلَا يُؤْخَذُ مِنْهَا عَدْلٌ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ

2:85

ثُمَّ أَنتُمْ هَٰٓؤُلَآءِ تَقْتُلُونَ أَنفُسَكُمْ وَتُخْرِجُونَ فَرِيقًا مِّنكُم مِّن دِيَٰرِهِمْ تَظَٰهَرُونَ عَلَيْهِم بِٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ وَإِن يَأْتُوكُمْ أُسَٰرَىٰ تُفَٰدُوهُمْ وَهُوَ مُحَرَّمٌ عَلَيْكُمْ إِخْرَاجُهُمْ أَفَتُؤْمِنُونَ بِبَعْضِ ٱلْكِتَٰبِ وَتَكْفُرُونَ بِبَعْضٍ فَمَا جَزَآءُ مَن يَفْعَلُ ذَٰلِكَ مِنكُمْ إِلَّا خِزْىٌ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَيَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ يُرَدُّونَ إِلَىٰٓ أَشَدِّ ٱلْعَذَابِ وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ

2:123

وَٱتَّقُوا۟ يَوْمًا لَّا تَجْزِى نَفْسٌ عَن نَّفْسٍ شَيْـًٔا وَلَا يُقْبَلُ مِنْهَا عَدْلٌ وَلَا تَنفَعُهَا شَفَٰعَةٌ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ

2:191

وَٱقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْ وَأَخْرِجُوهُم مِّنْ حَيْثُ أَخْرَجُوكُمْ وَٱلْفِتْنَةُ أَشَدُّ مِنَ ٱلْقَتْلِ وَلَا تُقَٰتِلُوهُمْ عِندَ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ حَتَّىٰ يُقَٰتِلُوكُمْ فِيهِ فَإِن قَٰتَلُوكُمْ فَٱقْتُلُوهُمْ كَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلْكَٰفِرِينَ

3:87

أُو۟لَٰٓئِكَ جَزَآؤُهُمْ أَنَّ عَلَيْهِمْ لَعْنَةَ ٱللَّهِ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةِ وَٱلنَّاسِ أَجْمَعِينَ

3:136

أُو۟لَٰٓئِكَ جَزَآؤُهُم مَّغْفِرَةٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَجَنَّٰتٌ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَنِعْمَ أَجْرُ ٱلْعَٰمِلِينَ

3:144

وَمَا مُحَمَّدٌ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ ٱلرُّسُلُ أَفَإِي۟ن مَّاتَ أَوْ قُتِلَ ٱنقَلَبْتُمْ عَلَىٰٓ أَعْقَٰبِكُمْ وَمَن يَنقَلِبْ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ فَلَن يَضُرَّ ٱللَّهَ شَيْـًٔا وَسَيَجْزِى ٱللَّهُ ٱلشَّٰكِرِينَ

3:145

وَمَا كَانَ لِنَفْسٍ أَن تَمُوتَ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ كِتَٰبًا مُّؤَجَّلًا وَمَن يُرِدْ ثَوَابَ ٱلدُّنْيَا نُؤْتِهِۦ مِنْهَا وَمَن يُرِدْ ثَوَابَ ٱلْـَٔاخِرَةِ نُؤْتِهِۦ مِنْهَا وَسَنَجْزِى ٱلشَّٰكِرِينَ

4:93

وَمَن يَقْتُلْ مُؤْمِنًا مُّتَعَمِّدًا فَجَزَآؤُهُۥ جَهَنَّمُ خَٰلِدًا فِيهَا وَغَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَلَعَنَهُۥ وَأَعَدَّ لَهُۥ عَذَابًا عَظِيمًا

4:123

لَّيْسَ بِأَمَانِيِّكُمْ وَلَآ أَمَانِىِّ أَهْلِ ٱلْكِتَٰبِ مَن يَعْمَلْ سُوٓءًا يُجْزَ بِهِۦ وَلَا يَجِدْ لَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا

जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं

दंड या प्रतिशोध

3:136

أُو۟لَٰٓئِكَ جَزَآؤُهُم مَّغْفِرَةٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَجَنَّٰتٌ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَنِعْمَ أَجْرُ ٱلْعَٰمِلِينَ

वैकल्पिक: उनका दंड उनके पालनहार की क्षमा और बाग़ हैं।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: उनका प्रतिफल उनके पालनहार की क्षमा और बाग़ हैं।

क्षमा और बाग़ अनुकूल प्रत्युत्तरी प्रतिफल हैं। ‘दंड’ या ‘प्रतिशोध’ वह नकारात्मक रुझान जोड़ता है जिसकी गारंटी यह शब्द-परिवार नहीं देता।

पुरस्कार

4:93

وَمَن يَقْتُلْ مُؤْمِنًا مُّتَعَمِّدًا فَجَزَآؤُهُۥ جَهَنَّمُ خَٰلِدًا فِيهَا وَغَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَلَعَنَهُۥ وَأَعَدَّ لَهُۥ عَذَابًا عَظِيمًا

वैकल्पिक: जो कोई किसी विश्वास रखने वाले व्यक्ति को जानबूझकर मारे, उसका पुरस्कार नरक है।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: जो कोई किसी विश्वास रखने वाले व्यक्ति को जानबूझकर मारे, उसका प्रतिफल नरक है।

नरक एक दंडात्मक प्रत्युत्तरी प्रतिफल है। ‘पुरस्कार’ वह सकारात्मक रुझान जोड़ता है जिसकी गारंटी यही शब्द-परिवार नहीं देता।

भुगतान को पूरे शब्द-परिवार का मूल अर्थ मानना

5:85

فَأَثَٰبَهُمُ ٱللَّهُ بِمَا قَالُوا۟ جَنَّٰتٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلْمُحْسِنِينَ

वैकल्पिक: यह भलाई करने वालों का भुगतान है: बाग़।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: यह भलाई करने वालों का प्रतिफल है: बाग़।

लौटाया गया परिणाम धनराशि नहीं है। ‘भुगतान’ शब्दवद्ध جِزْيَة रूप के लिए मान्य है, लेकिन वह पूरे शब्द-परिवार के स्थिर मूल अर्थ का स्थान नहीं ले सकता।

ठीक बराबर चुकौता

34:37

وَمَآ أَمْوَٰلُكُمْ وَلَآ أَوْلَٰدُكُم بِٱلَّتِى تُقَرِّبُكُمْ عِندَنَا زُلْفَىٰٓ إِلَّا مَنْ ءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحًا فَأُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ جَزَآءُ ٱلضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا۟ وَهُمْ فِى ٱلْغُرُفَٰتِ ءَامِنُونَ

वैकल्पिक: उनके लिए उनके किए का ठीक बराबर चुकौता है।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: उनके लिए उनके किए का कई गुना प्रतिफल है।

आयत कई गुने प्रतिफल का नाम लेती है। धातु एक प्रत्युत्तरी वापसी को चिह्नित करती है, जबकि उसकी मात्रा अलग से दी जाती है और उसका बराबर होना आवश्यक नहीं।

काम आना या पर्याप्त होना

55:60

هَلْ جَزَآءُ ٱلْإِحْسَٰنِ إِلَّا ٱلْإِحْسَٰنُ

वैकल्पिक: क्या अच्छे आचरण की पर्याप्तता अच्छे आचरण के सिवा कुछ और है?

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: क्या अच्छे आचरण का प्रतिफल अच्छे आचरण के सिवा कुछ और है?

किसी दूसरे की ओर से प्रतिफल देने के अर्थ में ‘काम आना’ या ‘पर्याप्त होना’ केवल तभी मान्य है जब جَزَى का प्रयोग عَنْ के साथ हो। साधारण संज्ञा लौटाए गए परिणाम का नाम है, उपयोगिता या पर्याप्तता का नहीं।

परिणाम या नतीजा

76:9

إِنَّمَا نُطْعِمُكُمْ لِوَجْهِ ٱللَّهِ لَا نُرِيدُ مِنكُمْ جَزَآءً وَلَا شُكُورًا

वैकल्पिक: हम तुमसे न कोई परिणाम चाहते हैं, न धन्यवाद।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: हम तुमसे न कोई प्रतिफल चाहते हैं, न धन्यवाद।

वक्ता दूसरों को खाना खिलाने के बदले जानबूझकर लौटाए गए जवाब को अस्वीकार करते हैं। केवल ‘परिणाम’ या ‘नतीजा’ उस जवाबी संबंध को व्यक्त नहीं करता।