क़ुरआन शब्दावली · स्वीकृत

بَارِئ / نَبْرَأ

अस्तित्व में लाने वाला

किसी चीज़ को अस्तित्व में आने देना। सक्रिय कृदंत को अस्तित्व में लाने वाला के रूप में व्यक्त किया गया है; रूपांतरित क्रिया अस्तित्व में लाना बताती है।

शब्दार्थिक दायरा

दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 4

शब्द-मूल: برأ

लेम्मा: بارئ · نبرأ

रूप: بَارِئِ · نَّبْرَأَ · بَارِئُ

प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 4; कुल संख्या: 4

क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 4।

2:54

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمْ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلْعِجْلَ فَتُوبُوٓا۟ إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَٱقْتُلُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:54

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمْ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلْعِجْلَ فَتُوبُوٓا۟ إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَٱقْتُلُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

57:22

مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِىٓ أَنفُسِكُمْ إِلَّا فِى كِتَٰبٍ مِّن قَبْلِ أَن نَّبْرَأَهَآ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌ

59:24

هُوَ ٱللَّهُ ٱلْخَٰلِقُ ٱلْبَارِئُ ٱلْمُصَوِّرُ لَهُ ٱلْأَسْمَآءُ ٱلْحُسْنَىٰ يُسَبِّحُ لَهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

शोध नोट

यह शब्दावली क्यों

किसी चीज़ को अस्तित्व में आने का कारण बनना।

इस स्वीकारित दायरे में केवल 2:54 की दो بَارِئ घटनाएँ, 59:24 की بَارِئ और 57:22 की نَبْرَأ शामिल हैं। सक्रिय कृदंत अस्तित्व में लाने वाले को उभारता है; प्रथम पुरुष बहुवचन का रूप “अस्तित्व में लाना” के रूप में दिया गया है। बाइबिलीय हिब्रू ברא / בּוֹרֵא दिव्य अस्तित्व-में-लाने की भाषा के लिए तुलनात्मक सहारा देता है, पर इसे शून्य से सृष्टि या पूरे अरबी मूल के एक ही मुख्य अर्थ का प्रमाण नहीं माना गया है। स्वामित्व, कारक, निश्चयवाचक चिह्न, कर्ता और कर्म अलग-अलग दर्शाए जाते हैं।

अन्य अर्थ कहाँ अपर्याप्त हैं: ‘दोष, निष्ठा या क्षति से अलग करना’ स्वयं 57:22 की अस्तित्व में लाने वाली रचना अथवा 2:54 और 59:24 के सृजनकारी सहभागी को व्यक्त नहीं करता। यह सीमित शब्दार्थ भेद है, इन प्रयोगों के बीच हर ऐतिहासिक संबंध असंभव होने का प्रमाण नहीं। ‘सृजन करना’ वैध विकल्प बना रहता है और विफल अर्थ के रूप में प्रस्तुत नहीं है। पुराने कई दायरों में फैले विफलता-कार्ड ऐतिहासिक साक्ष्य हैं, चार प्रयोगों की इस इकाई का प्रमाण नहीं।

अभी खुला: शेष सभी 27 प्रयोग अपनी प्रारूप स्थिति और अलग मौजूदा स्वामी बनाए रखते हैं, जिनमें मुक्ति, संबंध-विच्छेद, छूट, बहाली वाला रूप IV और 98:6–7 की بَرِيَّة शामिल हैं। 57:22 के स्त्रीलिंग एकवचन कर्म का पूर्वपद, पूरे मूल की व्युत्पत्ति, शून्य से सृजन और خالق व مصور से सटीक संबंध यहाँ तय नहीं होते। 98:6–7 के समूहवाचक शब्द के हमज़ा-युक्त पाठ-साक्ष्य और 2:167 का अलग रूपात्मक प्रश्न अपरिवर्तित हैं।