وَلَقَدْ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٍ مِّن قَبْلِكَ فَأَخَذْنَٰهُم بِٱلْبَأْسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ
क़ुरआन शब्दावली · प्रारूप
تَضَرَّعَ، تَضَرُّع
स्वयं-लोवेरिन्ग् अप्पेअल्
एक प्रतिभागी विनम्र रुख अपनाता है और ईमानदारी से भगवान की ओर अपील या स्मरण करता है।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 7
शब्द-मूल: ضرع
लेम्मा: تضرع · يتضرع
रूप: تَضَرُّعًا · يَتَضَرَّعُ · تَضَرَّعُ · يَضَّرَّعُ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 7; कुल संख्या: 7
क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 7।
فَلَوْلَآ إِذْ جَآءَهُم بَأْسُنَا تَضَرَّعُوا۟ وَلَٰكِن قَسَتْ قُلُوبُهُمْ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيْطَٰنُ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
قُلْ مَن يُنَجِّيكُم مِّن ظُلُمَٰتِ ٱلْبَرِّ وَٱلْبَحْرِ تَدْعُونَهُۥ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً لَّئِنْ أَنجَىٰنَا مِنْ هَٰذِهِۦ لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلشَّٰكِرِينَ
ٱدْعُوا۟ رَبَّكُمْ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلْمُعْتَدِينَ
وَمَآ أَرْسَلْنَا فِى قَرْيَةٍ مِّن نَّبِىٍّ إِلَّآ أَخَذْنَآ أَهْلَهَا بِٱلْبَأْسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمْ يَضَّرَّعُونَ
وَٱذْكُر رَّبَّكَ فِى نَفْسِكَ تَضَرُّعًا وَخِيفَةً وَدُونَ ٱلْجَهْرِ مِنَ ٱلْقَوْلِ بِٱلْغُدُوِّ وَٱلْـَٔاصَالِ وَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْغَٰفِلِينَ
وَلَقَدْ أَخَذْنَٰهُم بِٱلْعَذَابِ فَمَا ٱسْتَكَانُوا۟ لِرَبِّهِمْ وَمَا يَتَضَرَّعُونَ
जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं
भोजन
6:42
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٍ مِّن قَبْلِكَ فَأَخَذْنَٰهُم بِٱلْبَأْسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ
वैकल्पिक: कठिनाई सेइज़ेद् उन्हें अतः वह वे संभवतः भोजन
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: कठिनाई ने उन्हें पकड़ लिया ताकि वे विनम्रतापूर्वक विनती कर सकें
वह पुर्पोसे उपवाक्य आवश्यक करता है एक मानव प्रतिक्रिया को अफ्फ्लिक्तिओन, नहीं एक खाद्य सत्ता.
चपके से
6:63
قُلْ مَن يُنَجِّيكُم مِّن ظُلُمَٰتِ ٱلْبَرِّ وَٱلْبَحْرِ تَدْعُونَهُۥ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً لَّئِنْ أَنجَىٰنَا مِنْ هَٰذِهِۦ لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلشَّٰكِرِينَ
वैकल्पिक: तुम पुकारना उसे सेक्रेत्ल्य् और सेक्रेत्ल्य्
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: आप उसे विनम्र विनती और गोपनीयता के साथ बुलाते हैं
एन्त्रेअत्य और सेक्रेक्य हैं स्पष्टतः कोओर्दिनातेद के रूप में पृथक मान्नेर्स.
जम करूाइीं
23:76
وَلَقَدْ أَخَذْنَٰهُم بِٱلْعَذَابِ فَمَا ٱسْتَكَانُوا۟ لِرَبِّهِمْ وَمَا يَتَضَرَّعُونَ
वैकल्पिक: उन्होंने अपने प्रभु के प्रति समर्पण नहीं किया और उन्होंने समर्पण नहीं किया
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: वे दिद नहीं सुब्मित को उनका प्रभु और वे दिद नहीं हुम्ब्ल्य एन्त्रेअत
यह पद दो अलग-अलग नकारे गए विधेय का समन्वय करता है, इसलिए विनती समर्पण में परिवर्तित नहीं हो सकती।