क़ुरआन शब्दावली · स्वीकृत

ت و ب

लौटना

हटने या बाधित होने के बाद किसी पूर्व संबंध या मार्ग में फिर प्रवेश करना या उसे पुनः स्थापित करना।

शब्दार्थिक दायरा

दायरा: अर्थगत इकाई · प्रयोग: 87

शब्द-मूल: توب

लेम्मा: تاب · تواب · توبة · متاب · تائب · توب · تائبة

रूप: تَابَ · يَتُوبُ · تَابُ · تُوبُ · تَّوَّابُ · تُبْ · يَتُوبَ · تَوَّابًا · تَّوْبَةُ · تَوْبَةً · تَّوْبَةَ · تَوَّابٌ · أَتُوبُ · تَّوَّٰبِينَ · تَوْبَتُ · تَّٰٓئِبُونَ · تَّابَ · مَتَابِ · مَتَابًا · تَّوْبِ · يَتُبْ · تَتُوبَ · تَٰٓئِبَٰتٍ · تَوَّابًۢا

प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 87

क़ुरआन-क्रम में दायरा-बद्ध प्रयोगों का स्थान-आधारित संक्षिप्त पूर्वावलोकन—क्रम के आरंभ से प्रदर्शित संख्या: 10; कुल संख्या: 87। छोड़े गए प्रयोगों की संख्या 77 है; प्रदर्शित प्रयोगों को उनसे अधिक प्रबल साक्ष्य नहीं माना गया है।

2:37

فَتَلَقَّىٰٓ ءَادَمُ مِن رَّبِّهِۦ كَلِمَٰتٍ فَتَابَ عَلَيْهِ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:37

فَتَلَقَّىٰٓ ءَادَمُ مِن رَّبِّهِۦ كَلِمَٰتٍ فَتَابَ عَلَيْهِ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:54

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمْ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلْعِجْلَ فَتُوبُوٓا۟ إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَٱقْتُلُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:54

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمْ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلْعِجْلَ فَتُوبُوٓا۟ إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَٱقْتُلُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:54

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ إِنَّكُمْ ظَلَمْتُمْ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلْعِجْلَ فَتُوبُوٓا۟ إِلَىٰ بَارِئِكُمْ فَٱقْتُلُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ عِندَ بَارِئِكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:128

رَبَّنَا وَٱجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَآ أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:128

رَبَّنَا وَٱجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَآ أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:160

إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا۟ وَأَصْلَحُوا۟ وَبَيَّنُوا۟ فَأُو۟لَٰٓئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ وَأَنَا ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:160

إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا۟ وَأَصْلَحُوا۟ وَبَيَّنُوا۟ فَأُو۟لَٰٓئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ وَأَنَا ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

2:160

إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا۟ وَأَصْلَحُوا۟ وَبَيَّنُوا۟ فَأُو۟لَٰٓئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ وَأَنَا ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

क़ुरआन-अंतर्गत शब्दार्थिक आधार

दोनों दिशाओं में एक ही लौटना

कुरान लोगों के ईश्वर की ओर लौटने और ईश्वर के लोगों की ओर लौटने के लिए एक ही توب क्रिया का उपयोग करता है। कर्ता और पूर्वसर्ग दिशा तय करते हैं; वे दो शाब्दिक अर्थ नहीं बनाते।

यह एक संबंधपरक क्रिया है, संदर्भ द्वारा शब्द का अर्थ बदलना नहीं। लोग إِلَى के साथ ईश्वर की ओर लौटते हैं, जबकि ईश्वर عَلَى के साथ लोगों की ओर लौटता है। साथ की व्याकरण बताती है कि कौन और किस दिशा में लौटता है; توب का मूल लौटना ही रहता है।

9:118 की जोड़ीबद्ध भाषा निर्णायक है। ईश्वर पहले लोगों की ओर लौटा ताकि वे लौटें, और फिर आयत ईश्वर को تَوَّاب कहती है। पहले क्रिया को ‘पश्चात्ताप स्वीकार किया’ और दूसरे को ‘पश्चात्ताप किया’ कहना दोहराई गई अरबी क्रिया को छिपाता और बताए क्रम को उलट देता है।

आस-पास की शब्दावली नियंत्रित भेद देती है। 9:104 में يَقْبَلُ अलग से स्वीकारना है, जबकि تَوْبَة लौटने को नाम देता है। 2:187 में ईश्वर के लोगों की ओर लौटने के बाद عَفَا अलग से क्षमा देता है। 11:3 में आवरण माँगना और लौटना दो अलग क्रियाओं में क्रमित हैं।

फिर रूपरचना हिन्दी रूप तय करती है: पूर्ण क्रियाएँ लौटा, निर्देशात्मक अपूर्ण क्रियाएँ लौटता है, आज्ञार्थ और अन्य अचिह्नित रूप लौटना, सामान्य सहभागी लौटने वाले, मानव तीव्र बहुवचन बार-बार लौटने वाले, और ईश्वरीय तीव्र एकवचन सदा लौटने वाला है। ईश्वर के किसी हितग्राही की ओर लौटने से अनुग्रह अनुमानित हो सकता है, पर उसे शब्द-स्तर में नहीं जोड़ा जाता।

मूल पाठ के स्रोत

जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं

क्षमा करना

2:187

أُحِلَّ لَكُمْ لَيْلَةَ ٱلصِّيَامِ ٱلرَّفَثُ إِلَىٰ نِسَآئِكُمْ هُنَّ لِبَاسٌ لَّكُمْ وَأَنتُمْ لِبَاسٌ لَّهُنَّ عَلِمَ ٱللَّهُ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَخْتَانُونَ أَنفُسَكُمْ فَتَابَ عَلَيْكُمْ وَعَفَا عَنكُمْ فَٱلْـَٰٔنَ بَٰشِرُوهُنَّ وَٱبْتَغُوا۟ مَا كَتَبَ ٱللَّهُ لَكُمْ وَكُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكُمُ ٱلْخَيْطُ ٱلْأَبْيَضُ مِنَ ٱلْخَيْطِ ٱلْأَسْوَدِ مِنَ ٱلْفَجْرِ ثُمَّ أَتِمُّوا۟ ٱلصِّيَامَ إِلَى ٱلَّيْلِ وَلَا تُبَٰشِرُوهُنَّ وَأَنتُمْ عَٰكِفُونَ فِى ٱلْمَسَٰجِدِ تِلْكَ حُدُودُ ٱللَّهِ فَلَا تَقْرَبُوهَا كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ ءَايَٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ

वैकल्पिक: तो उसने तुम्हें क्षमा किया और तुम्हें क्षमा किया।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: तो वह तुम्हारी ओर लौटा और उसने तुम्हें क्षमा किया।

समन्वित عَفَا क्षमा को अलग क्रिया के रूप में देता है। इसलिए تَابَ का अर्थ पहले से ‘क्षमा किया’ नहीं हो सकता।

पश्चात्ताप स्वीकारने वाला

9:104

أَلَمْ يَعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ هُوَ يَقْبَلُ ٱلتَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِۦ وَيَأْخُذُ ٱلصَّدَقَٰتِ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

वैकल्पिक: ईश्वर अपने सेवकों का पश्चात्ताप स्वीकारता है, और ईश्वर पश्चात्ताप स्वीकारने वाला है।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: ईश्वर अपने सेवकों का लौटना स्वीकारता है, और ईश्वर सदा लौटने वाला है।

आयत स्वीकारने के लिए पहले ही يَقْبَلُ का उपयोग करती है। تَوَّاب को ‘पश्चात्ताप स्वीकारने वाला’ रखने से उसी वाक्य में قبول और توب का अंतर मिट जाता है।

पश्चात्ताप करना

9:118

وَعَلَى ٱلثَّلَٰثَةِ ٱلَّذِينَ خُلِّفُوا۟ حَتَّىٰٓ إِذَا ضَاقَتْ عَلَيْهِمُ ٱلْأَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ وَضَاقَتْ عَلَيْهِمْ أَنفُسُهُمْ وَظَنُّوٓا۟ أَن لَّا مَلْجَأَ مِنَ ٱللَّهِ إِلَّآ إِلَيْهِ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْ لِيَتُوبُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ

वैकल्पिक: फिर उसने उन पर पश्चात्ताप किया ताकि वे पश्चात्ताप करें।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: फिर वह उनकी ओर लौटा ताकि वे लौटें।

एक ही क्रिया में पहले ईश्वर कर्ता है और फिर लोग। ‘पश्चात्ताप करना’ दोनों प्रयोगों को असंबद्ध हिन्दी क्रियाएँ बना देता है और ईश्वर से मानव अपराधी का कार्य कराता है।

क्षमा माँगना

11:3

وَأَنِ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ يُمَتِّعْكُم مَّتَٰعًا حَسَنًا إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَيُؤْتِ كُلَّ ذِى فَضْلٍ فَضْلَهُۥ وَإِن تَوَلَّوْا۟ فَإِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ كَبِيرٍ

वैकल्पिक: अपने पालनकर्ता से आवरण माँगो, फिर उससे क्षमा माँगो।

शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: अपने पालनकर्ता से आवरण माँगो, फिर उसकी ओर लौटो।

आयत ٱسْتَغْفِرُوا और تُوبُوا को दो क्रियाओं के क्रम में रखती है। पहली आवरण माँगती है; दूसरी बताए गए गंतव्य की ओर लौटती है।