وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ ءَامِنُوا۟ كَمَآ ءَامَنَ ٱلنَّاسُ قَالُوٓا۟ أَنُؤْمِنُ كَمَآ ءَامَنَ ٱلسُّفَهَآءُ أَلَآ إِنَّهُمْ هُمُ ٱلسُّفَهَآءُ وَلَٰكِن لَّا يَعْلَمُونَ
क़ुरआन शब्दावली · स्वीकृत
سُفَهَاء
दोषपूर्ण निर्णय-बोध वाले लोग
سفه परिवार यह परखता है कि संबंधित क्षेत्र में निर्णय विश्वसनीय है या नहीं; व्याकरण पुरुष, वचन और क्रिया-रूप देता है।
शब्दार्थिक दायरा
दायरा: सावधानी से संकलित खंड-समूह · प्रयोग: 5
शब्द-मूल: سفه
लेम्मा: سفيه
रूप: سُّفَهَآءُ · سُّفَهَآءَ
प्रयोग के उदाहरणों की प्रदर्शित संख्या: 5; कुल संख्या: 5
क़ुरआन-क्रम में प्रदर्शित दायरा-बद्ध प्रयोगों की कुल संख्या: 5।
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ ءَامِنُوا۟ كَمَآ ءَامَنَ ٱلنَّاسُ قَالُوٓا۟ أَنُؤْمِنُ كَمَآ ءَامَنَ ٱلسُّفَهَآءُ أَلَآ إِنَّهُمْ هُمُ ٱلسُّفَهَآءُ وَلَٰكِن لَّا يَعْلَمُونَ
سَيَقُولُ ٱلسُّفَهَآءُ مِنَ ٱلنَّاسِ مَا وَلَّىٰهُمْ عَن قِبْلَتِهِمُ ٱلَّتِى كَانُوا۟ عَلَيْهَا قُل لِّلَّهِ ٱلْمَشْرِقُ وَٱلْمَغْرِبُ يَهْدِى مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ
وَلَا تُؤْتُوا۟ ٱلسُّفَهَآءَ أَمْوَٰلَكُمُ ٱلَّتِى جَعَلَ ٱللَّهُ لَكُمْ قِيَٰمًا وَٱرْزُقُوهُمْ فِيهَا وَٱكْسُوهُمْ وَقُولُوا۟ لَهُمْ قَوْلًا مَّعْرُوفًا
وَٱخْتَارَ مُوسَىٰ قَوْمَهُۥ سَبْعِينَ رَجُلًا لِّمِيقَٰتِنَا فَلَمَّآ أَخَذَتْهُمُ ٱلرَّجْفَةُ قَالَ رَبِّ لَوْ شِئْتَ أَهْلَكْتَهُم مِّن قَبْلُ وَإِيَّٰىَ أَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلسُّفَهَآءُ مِنَّآ إِنْ هِىَ إِلَّا فِتْنَتُكَ تُضِلُّ بِهَا مَن تَشَآءُ وَتَهْدِى مَن تَشَآءُ أَنتَ وَلِيُّنَا فَٱغْفِرْ لَنَا وَٱرْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلْغَٰفِرِينَ
जहाँ दूसरे अर्थ विफल होते हैं
मूर्ख लोग
4:5
وَلَا تُؤْتُوا۟ ٱلسُّفَهَآءَ أَمْوَٰلَكُمُ ٱلَّتِى جَعَلَ ٱللَّهُ لَكُمْ قِيَٰمًا وَٱرْزُقُوهُمْ فِيهَا وَٱكْسُوهُمْ وَقُولُوا۟ لَهُمْ قَوْلًا مَّعْرُوفًا
वैकल्पिक: अपनी जीवन-निर्वाह की संपत्ति मूर्खों को न दो; उसी में से उनका भरण-पोषण करो, उन्हें वस्त्र दो और उनसे उचित बात कहो।
शोधपरक अर्थ-प्रस्तुति: अपनी जीवन-निर्वाह की संपत्ति निर्णय में अक्षम लोगों को न दो; उसी में से उनका भरण-पोषण करो, उन्हें वस्त्र दो और उनसे उचित बात कहो।
आदेश जीवन-निर्वाह की संपत्ति पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रोकता है, फिर भी भरण-पोषण, वस्त्र और उचित वाणी अनिवार्य करता है। यह संरचना प्रबंधन और निर्णय-क्षमता के सीमित आकलन का वर्णन करती है। ‘मूर्ख लोग’ चरित्र की निंदा जैसा लगता है और संपत्ति के पर्यवेक्षित नियंत्रण का वस्तुनिष्ठ कारण धुंधला कर देता है।